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अश्विनी वैष्णव रील्स से बाहर आओ ,सच का अनुभव करो।

इस समय हमारा देश सत्ता परिवर्तन के एक तप को अनुभव कर रहा है । यह कुछ अलग है । ज्यों देशवासियों वास्तव से कोसों दूर ले जा रहा है । सत्ता मे बैठे लोग अपनी धुन मे सत्ता को चला रहे है । उसका हरजाना जनता भुगत रही हैं । केवल भारतीय रेल का विचार करते है ,तब भी सत्ता की मनमानी को बेहद करीब से अनुभव किया जा सकता है । क्यू के देश का हर नागरिक इस व्यवस्था से रोज जूजता है , हरदिन भिड़ता है ,पीड़ित हो रहा हैं ।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्री मण्डल मे गिनेचुने सुलझे हुए मंत्री है , इनमेसे एक नाम अश्विनी वैष्णव का है । इनके पास रेल मंत्रालय के साथ इनके पास भारत सरकार का पत्र सूचना मंत्रालय का भी कामकाज है । इनके कार्यकाल मे रेल का विस्तार जोरों से चल रहा है । यह विकास जनता के पैसों को लूट कर किया रहा है । इस सच्चाई को कभी न कभी पूरी ईमानदारी से कबुल करना पड़ेगा ।

भारतीय रेल के मंत्रालय ने सार्वजनिक की जानकारी के आधार पर यह लूट का सबूत सामने आता है । ज्यों यह है , पूरे देश मे हर दिन करींब बारह लाख ऑनलाइन टिकट खरीदे जाते है । हर टिकट पर कंविनियन्स चार्ज वसूला जा रहा है । ज्यों कम से कम तीस रुपये है । टिकट के क्लास के हिसाब से ज्यादा भी है पर तीस रूपये से कम नहीं है । जिसका जोड़ करते है ,तो यह करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये हो जाता है । साल का लगभग बारह सौ करोड़ हो जाता है । और यह पिछले दशक से वसूला जा रहा है । रेल का विकास कर के निजी गाड़िया चलाई जा रही है । आम जनता के हक्क की पसेन्जर सेवाये बंद कर दो गुने दाम पर फास्ट और तीन गुने दाम पर सुपर फास्ट का किराया वसूला जा रहा है। आम यात्री को इस पैसा कमाने की षडयन्त्र मे यात्रा करने को मजबूर किया जा रहा है । कंविनियन्स चार्जेस वसूल ने का कोई ठोस कारण नहीं है , दूसरा ओर एक लूट का रास्ता खोल गया है , जब के हर टिकट पर जीएसटी ,सीएसटी वसूल किया ही जा रहा है । आईआरसीटीसी के वालेट से भी टिकट बुक किया जाता है तो दस रुपये , upi से भी पेमेंट करने पर हर बुकिंग पर दस रुपये वसूलना यह दिन दहाड़े जनता की लूट है । जब आपने जीएसटी, सीएसटी वसूला है तो यह अलग अलग टाइटल पर कितना लूटोगे इस सवाल का जबाब जनता को देना चाहिए ।

बड़े जोर शोर से भारतीय रेल की नई वेबसाइट की मार्केटिंग की जा रही हैं । चूंकि वैष्णव पत्र सूचना के मंत्री है ,तो उनकी चापलूसी की जानी स्वाभाविक है । सच को छुपाये बिना भी चापलूसी संभव है । जिससे देश वासियों के साथ विश्वासघात न हो । इस लेख के साथ मैंने कुछ स्क्रीनशॉट दिए है । इसे आप खुद भी जा कर चेक कर सकते है । इतना पैसा कमानेवाला यह मंत्रालय एक एक्सपायर डोमेन इस्तेमाल कर रहा है और उसे मुहय्या करनेवाली कंपनी सीना तान के गूगल सर्च इंजिन पर सौजन्य कह रही है ।

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इसके पहेले फोटो मे आपको यू टी एस का स्क्रीनशॉट दिखाई दे रहा है , खाते की सही जानकारी के बावजूद यह मेसेज दिया जा रहा हैं ।

दूसरे फोटो मे आईआरसीटीसी के जहा पर सभी सही जानकारी के बावजूद ऐसे मेसेज दिए जाते है । तीसरा शॉट ज्यों नए एप रेलवन का है जहा आईआरसीटीसी की खाते की लॉगिन जानकारी के बावजूद यह मेसेज दिया जा रहा है ।

निचले पहेले फोटो मे यूजर को खाते की जानकारी भूल गया है , उससे ज्यों भुला है वह जानकारी कैसे अनिवार्य की जा सकती है । पासवर्ड रेसेट को इतना जटिल किया गया हैं के उसमे यूजर का दिन खराब हो जाता है । इतनी साधारण बात यह एप /वेब साइट बनानेवाले को कैसे समझ नहीं आ रही है ।

रेल प्रबंधन ने अपनी वेबसाइट पर ई क्वेरी का पर्याय निर्माण किया है पर उसकी सच्चाई इस फोटो मे दिखाई देगी ।

देशवासियों को उलझन मे डालकर विकास का अनुभव करवाना उन्हे परेशानी मे डालने जैसा है । साथ ही सरकार की व्यवस्था के गैर जिम्मेदारी और अनदेखी का सबूत है । विकास अननफानन मे नहीं किया जाता। आज आप जरा सी उपलब्धि को रील्स के सहारे देखा रहे हो । आप पढे लिखे सुलझे हुए व्यक्तित हो और आपका ऊपरी सतह पर विकास को देखना और उसका जोर शोर करना सही नहीं है । वेबसाइट /एप (पब्लिक) जनता के लिए बनाते है ,तो उसका यूजर इंटरफेस बेहद सहज और सरल होने के साथ सुरक्षित होना चाहिए न के बार बार लॉगिन करने की जरूरत पड़े । टिकट आसानी से बुक हो और अपनीप्रेफ़्रन्स की सीट यूजर को मिले इससे ज्यादा उसे कुछ नहीं चाहिए । जहा तक मेरा निरीक्षण हैं वह यही बात सकता हु , आप अभितक यह तय नहीं कर पाए है के हमे डिजिटल बुकिंग पर जाना है या खिड़की वाली व्यवस्था को चलना है ।

By Admin

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